
अमीन सायानी पेश करते हैं -
नंदी दुग्गलस “दी आरट औफ सिंगिंग” (शिक्षा)
अगर मैं गा सकता हूँ --- तो आप क्यों नहीं ???
कृपया यह पूरी जानकारी पढ़ें
1. गायन के लिए अपने शरीर के कार्यों को समझना।
हमारा संगीत सीखने का तरिका हमेशा से ही ‘रट्टा’(बार-बार दोहराकर सीखना) लगाने का होता हैं। यह सैकड़ों वर्ष से चला आ रहा है। हमे सिर्फ सिखाया जाता है – ‘रियाज़ करो’.. ‘रियाज़ करो’… ‘रियाज़ करो’! कई घंटो तक। हमे हमेशा कहा जाता है रियाज़ ‘दिल से करो’। जीवन के हर क्षेत्र में वास्तविकता को खोजने के लिए विज्ञान ने कई चमत्कार किए हैं। विज्ञान ने पाया हैं के दिल हमारे शरीर में बिल्कुल नहीं सोचता, यह हमारे रक्त का केवल एक भंडार गृह है जो सिर्फ हमारे शरीर के सभी भागों में रक्त भेजने के लिए और वापस प्रप्त करने के लिए होता है। लेकिन ये बिल्कुल सोचता नहीं है। हां! यह किसी भी समारोह को आदेश नहीं दे सकता है । आपका दिमाग़ आपके पूरे शरीर के कार्यों को नियंत्रित करता है। दिमाग़ दुनिया में कुछ भी कर सकता है। यह हमारे शरीर का पावर हाउस है जो सभी भावनाओं, विचारों, दर्द, प्रेम, भाषण, फेफड़े, आंख, कान आदि का मास्टर हैं। लिखित रूप में इसके कार्यों का वर्णन करने के लिए, असीमित पृष्ठ लिखना असंभव होगा। इस ग्रह पर सारा विज्ञान, केवल दिमाग़ के आदेशों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है (लेकिन हम आज भी अपनी कविता और इच्छाओं में 'दिल' लिखते हैं)। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम अपने दैनिक जीवन और कविता आदि में 'दिल' अभिव्यक्ति (expression) के साथ उपयोग किया जाता है। यह अभिव्यक्ति (expression) 'दिल' हमारे शरीर में अंतर्निहित (embedded) है। गायिकी और सब दोसरे कामो में दिल कहना आसान है लेकिन असल में ये दिमाग़ का काम है।
